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हाई कोर्ट जज पर अमर्यादित टिप्पणी का मामला, बिना शर्त माफीनामा पेश करने के लिए वकील को दो सप्ताह का समय…

भोपाल : जबलपुर हाई कोर्ट में जस्टिस अनुराधा शुक्ला की कोर्ट में एक वकील द्वारा उनपर की गई अमर्यादित टिप्पणी को जज ने गंभीरता से लिया और इसे कोर्ट की अवमानना मनाते हुए पूरे घटनाक्रम की प्रमाणित जानकारी मुख्य न्यायाधीश को भेज दी थी, बुधवार को कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इसपर सुनवाई की और वकील पीसी पालीवाल की मांग पर उन्हें बिना शर्त माफीनामा देने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया है।

करीब एक सप्ताह पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई का नंबर नहीं आने पर एडवोकेट पीसी पालीवाल हाई कोर्ट जस्टिस अनुराधा शुक्ला से नाराज हो गए। उन्होंने जज से कहा था कि, इस कोर्ट में 4 घंटे से तमाशा चल रहा है, मैं बैठा देख रहा हूं। हाई कोर्ट के जज दूसरी जगह जाकर कहते हैं कि नए जज की नियुक्ति करो, लेकिन जजेस का हाल तो देखो। जो दिल्ली में हुआ वह भी देखा जाए। पीसी पालीवाल की इस टिप्पणी को जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने गंभीरता से लेते हुए, कोर्ट की अवमानना माना और इस पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए प्रमाणित प्रति हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अग्रिम कार्यवाही के लिए भेज दी थी।

बुधवार को चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बैंच ने एडवोकेट के खिलाफ आपराधिक अवमानना की सुनवाई की। इस दौरान अधिवक्ता पीसी पालीवाल ने उपस्थित होकर कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफीनामा पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद दो सप्ताह का समय प्रदान किया है।

इसलिए नाराज हो गए थे एडवोकेट पालीवाल 

मुख्य न्यायाधीश को भेजी प्रमाणित प्रति में जस्टिस शुक्ला ने पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा लिखा, और ये कहा कि इस प्रकार की भाषा अत्यंत अनुचित है और यह अदालत की प्रतिष्ठा के विरुद्ध है। दरअसल वकील साहब का केस का नंबर नहीं आने से वे झल्ला गए थे और उन्होंने जस्टिस अनुराधा शुक्ला पर अमर्यादित टिप्पणी कर दी ।

चीफ जस्टिस को बता चुके हैं कि हम इनसे त्रस्त हैं: पालीवाल 

उधर एडवोकेट पालीवाल के मुताबिक, जस्टिस शुक्ला के पास 22 मार्च को 149 केस सुनवाई के लिए आए थे, पर अधिकांश समय उन्होंने केवल उन 6 मामलों पर लगाया, जिनमें सेशन कोर्ट पहले ही आरोपियों को जमानत दे चुका था। एडवोकेट का कहना था कि मैडम जिला जज रही, अब हाई कोर्ट जज बन गई है, फैमिली कोर्ट और क्रिमिनल कोर्ट का काम तो किया ही नहीं, हम चीफ जस्टिस को बता चुके हैं कि हम इनसे त्रस्त हैं।

…तो मैं वकालत छोड़ दूंगा : एडवोकेट पालीवाल 

एडवोकेट पालीवाल के अनुसार, उनका यह केस 20 बार लग चुका है, बड़ी मुश्किल से आज नंबर आया। मैं अपने केस की बहस यहां नहीं करना चाहता। इसे किसी अन्य बेंच में भेज दिया जाए। पालीवाल ने यह भी कहा कि उन्होंने चीफ जस्टिस से बातचीत कर स्पष्ट किया कि यदि ऐसी स्थिति बनी रही, तो वह वकालत छोड़ देंगे। चीफ जस्टिस ने उन्हें आश्वस्त किया कि ‘आपको वकालत छोड़ने की आवश्यकता नहीं है।